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माँकालीजी प्रथम मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं क्रीं महाकालिकायै नमः।
जय माँ काली। जय महाकाली। जय भद्रकाली।
माता के श्रीचरणों में कोटि-कोटि प्रणाम।
श्मशान वासिनी, काल की स्वामिनी,
करुणामयी, जगदम्बा, जगजननी।
रक्तवर्णी, अघोर रूप धारिणी,
भक्तों की रक्षा करने वाली, दयामयी भवतारिणी।
गल में मुंडमाल, हाथ में खप्पर,
साथ विराजें भैरव शंकर।
पर भक्तों पर बरसे स्नेह अपार,
माँ का हृदय सदा करुणा का भंडार।
भवभय हारिणी, शक्ति अपार,
अज्ञान मिटाओ, दो सदाचार।
सत्य, प्रेम और धर्म बढ़ाओ,
जीवन में शुभ प्रकाश जगाओ।
जय माँ काली! आदेश! आदेश!
एक ही संदेश — प्रेम और सद्भाव का संदेश।
जय माँ काली! आदेश! आदेश!
चौंसठ योगिनी, बावन वीर,
माँ की कृपा से हों सब अधीर।
दसों दिशाओं में मंगल छाए,
सत्य और सेवा का दीप जलाए।
जड़ से चेतन, टूटे अज्ञान,
जगे भीतर शिव का ज्ञान।
भय मिटे, विश्वास बढ़े,
सद्बुद्धि से जीवन आगे बढ़े।
हाथ त्रिशूल और खप्पर धारी,
जगतजननी महाकाली प्यारी।
जहाँ-जहाँ जाऊँ नगर-डगर,
वहाँ-वहाँ प्रेम और शक्ति का सागर।
माँ की हुंकार से हटे अंधकार,
जगे विवेक और आत्मप्रकाश अपार।
भस्म हों मन के लोभ-अहंकार,
जगे दया, क्षमा और सद्विचार।
कामरूप कामाख्या की आन,
दसों दिशा में माँ का मान।
भद्रकाली भय का नाश करें,
भक्तों के जीवन में विश्वास भरें।
रोग-शोक सब दूर भगाएँ,
रिद्धि-सिद्धि, शांति, संतोष दिलाएँ।
अन्नपूर्णा का आशीष मिले,
हर घर में सुख-समृद्धि खिले।
मैं न देह, मैं न अभिमान,
जपूँ निरंतर माँ का नाम।
सबमें देखूँ एक ही ज्योति,
सबका करूँ हृदय से सम्मान।
शब्द सांचा, पिंड काचा,
चलो मन्त्र ईश्वरो वाचा।
जो कहा सो शुभ हो जाए,
माँ की कृपा से मंगल छाए।
सर्वे भवन्तु सुखिनः।
सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु।
मा कश्चिद् दुःखभाग् भवेत्।
ॐ क्रीं क्रीं क्रीं महाकालिकायै नमः।
जय माँ काली। जय महाकाली।
आदेश! आदेश! आदेश! आदेश!
माँकालीजी द्वितीय मंत्र
शमशान वासिनी, काल की स्वामिनी
रक्त वर्णी, अघोर रूप धारिणी
गल मुंडमाल, खप्पर है हाथ
काली चले भैरव के साथ
भव भय हारिणी, शक्ति अपार
कर दे पल में दुष्ट संहार
जय माँ काली! आदेश! आदेश!
एक ही संदेश! आदेश!
आदेश! चौसठ योगिनी, बावन वीर
जहाँ भेजूँ, वहाँ छोड़ूँ तीर
आदेश! आदेश!
आगे-आगे काली विराजे
जय माँ काली! जय माँ काली!
काल का लेखा
पल में मोड़े
दुष्टों का
घमंड तोड़े
ॐ क्रीं क्रीं फट! आदेश तत्!
आदेश! जय माँ काली! आदेश! आदेश!
जड से चेतन, तोड़े हर बंधन
जय माँ काली! आदेश! आदेश!
शब्द सांचा, पिंड काचा
चलो मन्त्र ईश्वरो वाचा
हाथ त्रिशूल , और खप्पर भारी
रण में नाचे , महाकाली अवतारी
जहाँ-जहाँ जाऊँ नगर डगर
लगे वहां फिर शक्ति का मेला
माँ की हुंकार , काल भी कांपे
भस्म हो जाए सब पाप जो तापे
जय काली! जय काली! जय काली!
कामरूप कामाख्या की आन
दसों दिशा में माँ तेरा मान
भय का नाश, करे भद्रकाली
रण में अजेय, मेरी महाकाली
रोग-शोक सब पल में काटे
रिद्धि-सिद्धि भक्तों को बांटे
मैं न देह, मैं न नाम
जपूँ निरंतर काली नाम
शब्द सांचा, पिंड काचा
ईश्वरो वाचा, सत्य राचा
जो कहा, सो हुआ, माँ की वाणी ब्रह्म सत्य
ॐ क्रीं क्रीं फट!
काल कर्म क्लेश भस्म, स्वाहा!
आदेश! आदेश! आदेश! आदेश!