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गुरुवार, 11 जून 2026

#माँकालीजी, #साबर भजन मंत्र, #आदेश #साबरमंत्र, #नाथपरंपराए, #माँकालीभक्त

#माँकालीजी, #साबर भजन मंत्र,   #आदेश #साबरमंत्र, #नाथपरंपराए, #माँकालीभक्त



माँकालीजी प्रथम मंत्र


ॐ श्रीं ह्रीं क्रीं महाकालिकायै नमः।
जय माँ काली। जय महाकाली। जय भद्रकाली।
माता के श्रीचरणों में कोटि-कोटि प्रणाम।

श्मशान वासिनी, काल की स्वामिनी,
करुणामयी, जगदम्बा, जगजननी।
रक्तवर्णी, अघोर रूप धारिणी,
भक्तों की रक्षा करने वाली, दयामयी भवतारिणी।

गल में मुंडमाल, हाथ में खप्पर,
साथ विराजें भैरव शंकर।
पर भक्तों पर बरसे स्नेह अपार,
माँ का हृदय सदा करुणा का भंडार।

भवभय हारिणी, शक्ति अपार,
अज्ञान मिटाओ, दो सदाचार।
सत्य, प्रेम और धर्म बढ़ाओ,
जीवन में शुभ प्रकाश जगाओ।

जय माँ काली! आदेश! आदेश!
एक ही संदेश — प्रेम और सद्भाव का संदेश।
जय माँ काली! आदेश! आदेश!

चौंसठ योगिनी, बावन वीर,
माँ की कृपा से हों सब अधीर।
दसों दिशाओं में मंगल छाए,
सत्य और सेवा का दीप जलाए।

जड़ से चेतन, टूटे अज्ञान,
जगे भीतर शिव का ज्ञान।
भय मिटे, विश्वास बढ़े,
सद्बुद्धि से जीवन आगे बढ़े।

हाथ त्रिशूल और खप्पर धारी,
जगतजननी महाकाली प्यारी।
जहाँ-जहाँ जाऊँ नगर-डगर,
वहाँ-वहाँ प्रेम और शक्ति का सागर।

माँ की हुंकार से हटे अंधकार,
जगे विवेक और आत्मप्रकाश अपार।
भस्म हों मन के लोभ-अहंकार,
जगे दया, क्षमा और सद्विचार।

कामरूप कामाख्या की आन,
दसों दिशा में माँ का मान।
भद्रकाली भय का नाश करें,
भक्तों के जीवन में विश्वास भरें।

रोग-शोक सब दूर भगाएँ,
रिद्धि-सिद्धि, शांति, संतोष दिलाएँ।
अन्नपूर्णा का आशीष मिले,
हर घर में सुख-समृद्धि खिले।

मैं न देह, मैं न अभिमान,
जपूँ निरंतर माँ का नाम।
सबमें देखूँ एक ही ज्योति,
सबका करूँ हृदय से सम्मान।

शब्द सांचा, पिंड काचा,
चलो मन्त्र ईश्वरो वाचा।
जो कहा सो शुभ हो जाए,
माँ की कृपा से मंगल छाए।

सर्वे भवन्तु सुखिनः।
सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु।
मा कश्चिद् दुःखभाग् भवेत्।

ॐ क्रीं क्रीं क्रीं महाकालिकायै नमः।
जय माँ काली। जय महाकाली।
आदेश! आदेश! आदेश! आदेश!


माँकालीजी द्वितीय मंत्र

शमशान वासिनी, काल की स्वामिनी
रक्त वर्णी, अघोर रूप धारिणी
गल मुंडमाल, खप्पर है हाथ
काली चले भैरव के साथ

भव भय हारिणी, शक्ति अपार

कर दे पल में दुष्ट संहार

जय माँ काली! आदेश! आदेश!

एक ही संदेश! आदेश!


आदेश! चौसठ योगिनी, बावन वीर

जहाँ भेजूँ, वहाँ छोड़ूँ तीर

आदेश! आदेश!

आगे-आगे काली विराजे

जय माँ काली! जय माँ काली!

काल का लेखा

पल में मोड़े

दुष्टों का

घमंड तोड़े

ॐ क्रीं क्रीं फट! आदेश तत्!

आदेश! जय माँ काली! आदेश! आदेश!

जड से चेतन, तोड़े हर बंधन

जय माँ काली! आदेश! आदेश!

शब्द सांचा, पिंड काचा

चलो मन्त्र ईश्वरो वाचा

हाथ त्रिशूल , और खप्पर भारी

रण में नाचे , महाकाली अवतारी

जहाँ-जहाँ जाऊँ नगर डगर

लगे वहां फिर शक्ति का मेला

माँ की हुंकार , काल भी कांपे

भस्म हो जाए सब पाप जो तापे

जय काली! जय काली! जय काली!

कामरूप कामाख्या की आन

दसों दिशा में माँ तेरा मान

भय का नाश, करे भद्रकाली

रण में अजेय, मेरी महाकाली

रोग-शोक सब पल में काटे

रिद्धि-सिद्धि भक्तों को बांटे

मैं न देह, मैं न नाम

जपूँ निरंतर काली नाम

शब्द सांचा, पिंड काचा

ईश्वरो वाचा, सत्य राचा

जो कहा, सो हुआ, माँ की वाणी ब्रह्म सत्य

ॐ क्रीं क्रीं फट!

काल कर्म क्लेश भस्म, स्वाहा!


आदेश! आदेश! आदेश! आदेश!

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प्रथम मंत्र,

जय आदिनाथ, जय गुरुवर महान।
जय श्री मच्छिंद्रनाथ, जय श्री गोरक्षनाथ।
आपकी कृपा से प्रकाशित हो जीवन का हर पथ।

अलख निरंजन! आदेश! आदेश!
सद्गुरु चरणों में शत-शत वंदन।
करुणा बरसे, मिटे अज्ञान,
जगे अंतर का दिव्य ज्ञान।

सबका मंगल, सबका कल्याण,
सबमें दिखे शिव का सम्मान।
प्रेम, दया, सेवा और सत्य,
यही हो जीवन का परम व्रत।

नव नाथों का पावन आशीष,
बने सदा जीवन का अधीश।
गुरु-कृपा से दृढ़ हो विश्वास,
मिटे मन का हर संत्रास।

जहाँ करुणा, वहीं शिवधाम,
जहाँ क्षमा, वहीं श्रीराम।
जहाँ सद्भाव, वहीं प्रकाश,
वहीं विराजे परम निवास।

भेदभाव सब दूर हो जाएँ,
सद्बुद्धि से सब गले मिल जाएँ।
नारी-नर सब एक समान,
सबमें बसता दिव्य भगवान।

धर्म, धैर्य, शांति, सदाचार,
जीवन बने उज्ज्वल, साकार।
माता अन्नपूर्णा दें समृद्धि,
महादेव दें निर्मल बुद्धि।

हनुमत बल से साहस जागे,
गुरु-कृपा से भाग्य सुहागे।
सत्य, संयम, प्रेम, विवेक,
बनें हमारे जीवन-टेक।

शब्द सांचा, पिंड काचा,
चलो मन्त्र ईश्वरो वाचा।
अलख निरंजन! आदेश! आदेश!
सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःखभाग् भवेत्।

ॐ शिवगोरक्षाय नमः।
ॐ श्री गुरवे नमः।
अलख निरंजन! आदेश! आदेश! आदेश!


द्वितीय मंत्र

माया लेके आये मच्छिंदर
झोली में युग, भस्म, अंबर
रुद्र माला, वैराग्य छाया
भोग-मोक्ष का भेद दिखाया

नाथ पंथ के दादा गुरु
काया पलटे सत्य शुरू
अलख निरंजन आदेश!
एक ही संदेश, आदेश!

काल कर्म क्लेश भस्म
जोगी निर्विशेष
आदेश! आदेश!
आगे आगे गोरख जागे
अलख निरंजन!
अलख निरंजन!

काल का लेखा, पल में जले
अघोर अग्नि में, भाग्य ढले
ॐ रम् रम् रम्  हूं हूं फट्
क्रीं कालाग्नये आदेश तत्

अलख निरंजन! आदेश! आदेश!
जड से चेतन, टूटे हर बंधन
अलख निरंजन! आदेश! आदेश!
शब्द सांचा, पिंड कंचा
चलो मन्त्र ईश्वरो वाचा

भगवा वेश, हाथ में खप्पर
भैरव रूप, शिव का जपकर
जहाँ-जहाँ जाऊँ नगर डगर
लगे वहाँ फिर जोगी मेला
शिव का धुना, गोरख तापे
काल कंटक थर थर कांपे
हूं फट्! हूं फट्! हूं फट्!

नव नाथ करें मेरी रक्षा
चारों युग में साथ की यक्षा
हनुमंत बलवान,
करे भय का नाश
रोग-शोक कटे, पल में आज
रिद्धि सिद्धि आंगन आये
अन्नपूर्णा अन्न बरसाये
मैं न देह, मैं न नाम
मैं केवल ज्वाला, केवल राम
शब्द सांचा, पिंड काचा
ईश्वरो वाचा, सत्य राचा
जो कहा, सो हुआ
नाथ की वाणी, ब्रह्म सत्य
ॐ क्रीं हूं फट्
काल कर्म क्लेश भस्म
स्वाहा आदेश! आदेश! आदेश!

ॐ गुरु जी
गोरख जती मछेन्द्र का चेला
शिव के रूप में दिखे अलबेला
कानों कुंडल गले में नादी
हाथ त्रिशूल नाथ है आदि
अलख पुरुष को करूँ आदेश
जन्म-जन्म के काटो कलेश
भगवा वेश हाथ में खप्पर
भैरव शिव का चेला
जहाँ जहाँ जाऊं नगर डगर
लगे वहां फिर मेला
शिव का धुना गोरख तापे
काल कंटक थर थर कांपे
मेरी रक्षा करे नव नाथ
राम दूत हनुमंत बलवंत
रिद्धि सिद्धि आंगन विराजे
माई अन्नपूर्णा सुखवंत
शब्द सांचा पिंड काचा
चलो मन्त्र ईश्वरो वाचा
अलख निरंजन! आदेश! आदेश!

सब में समाया, एक ही प्रकाश
ना ऊँचा कोई, ना कोई नीचा
एक समान, ज्योत का आश
अलख निरंजन! आदेश! आदेश!
शिव में जीव, सहज ही लीन
अनंत से अनंत तक
पाये शिवत्व, योगी प्रवीण
घट में ज्योत है, ज्योत में घट
जो खोजे बाहर, वो भीतर ही बसे
ॐ शिवगोरक्ष
आदेश! आदेश! आदेश! आदेश!

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