ॐ श्री गुरुभ्यो नमः।
आदेश गुरुजी को, शत-शत प्रणाम।
सद्गुरु चरणों में कोटि-कोटि वंदन।
वीर हनुमान, श्रीराम के परम दूत,
माता अंजनी के तेजस्वी पूत।
महाबली, महावीर, भक्तवत्सल, संकटमोचन,
करुणामय, दयामय, धर्म के रक्षक, लोकहित के पोषक।
आओ-आओ पवनसुत हनुमान,
प्रेम, साहस और सद्बुद्धि के साथ पधारो।
मेरे ही नहीं, सब प्राणियों के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करो।
जहाँ भय हो वहाँ निर्भयता,
जहाँ अज्ञान हो वहाँ ज्ञान,
जहाँ निराशा हो वहाँ आशा का प्रकाश भर दो।
सिया का संदेश लाने वाले,
लक्ष्मण के प्राण बचाने वाले,
श्रीराम-भक्ति के अमर प्रतीक,
हमारे हृदय में सेवा, विनय और समर्पण जगाओ।
दुष्ट प्रवृत्तियों का नाश हो,
क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार का क्षय हो।
भय, भ्रम और नकारात्मकता दूर हो।
सत्य, प्रेम, धैर्य, विवेक और करुणा का वास हो।
जहाँ-जहाँ जाऊँ, वहाँ-वहाँ मंगल हो।
सभी जीवों का सम्मान हो।
सबमें श्रीराम का अंश दिखाई दे,
सबके प्रति सद्भाव और शुभकामना बनी रहे।
आगे धर्म, पीछे सत्य,
साथ चले श्रीराम की भक्ति।
वीर हनुमान सदा सहायक बनें,
धैर्य, पराक्रम और सदाचार प्रदान करें।
दुहाई श्रीरामचन्द्र जी की।
दुहाई माता जानकी जी की।
दुहाई महादेव शिवशंकर की।
दुहाई माता अंजनी की।
दुहाई भक्तों के कल्याणकारी पवनपुत्र हनुमान की।
लोहे की कोठरी, ताँबे का ताला,
मेरी, मेरे परिवार की और समस्त सज्जनों की रक्षा करें वीर बजरंगबाला।
घर-आँगन में सुख, शांति और समृद्धि का वास हो।
अन्नपूर्णा की कृपा, शिव का आशीष और श्रीराम की भक्ति सदा बनी रहे।
शब्द सांचा, पिंड काचा।
फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा।
सत्य नाम आदेश गुरु का।
सर्वे भवन्तु सुखिनः।
सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु।
मा कश्चिद् दुःखभाग् भवेत्।
जय श्रीराम।
जय वीर हनुमान।
जय सद्गुरु।
आदेश। आदेश। आदेश।
#हनुमानजी साबर भजन द्वितीय मंत्र,

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